बचपना न जाये |
वक़्त आ चूका - नादानियां छोड़ दो,
पर शरारतों की नज़ाकत को बचा के रखो |
बचपन जा चूका - मासूमियत को परे करो,
पर बचपन की उस मुसकुराहट को कभी किनारे न करो|
वोह समय बीत गया - जब माँ के हाथ से ही रोटी खाते थे,
माँ के खाने की आज भी तारीफ करो |
जीवन का वोह मोड़ आ चूका - जब माँ का आँचल छोड़ना पड़ेगा,
पर माँ के चरणों से कभी दूर न जाना |
बचपन अब पीचे छूट गया - बाप की समझ अब पुरानी हो चुकी,
पर बाप की नासिहियत की आज भी कदर करो |
बचपन छोड़ आये तुम पीछे - जब बहन को सताया करते थे ,
लेकिन उसकी उतनी ही और उससे भी ज्यादा फ़िकर, आगे भी करते रहो |
वोह पल चले गए - जब भाई के साथ लड़ जाते थे, बात बात पर,
पर यह कभी भूलना न, की उसी भाई के लिए, सारे जग से भी तो लड़ जाया करते थे |
उसी मिटटी मे जिसमें तुम खेले हो,
उस मिटटी को कभी पैसे के साथ मत तोलना |
लम्हे जो चले गए - बहुत सारी यादें दे गए,
भूलना मत उनको, क्यूँकी वहीँ से तो तुम्हारी शुरुवात हुई |
बचपन तो जाना ही था, वोह चले गया |
पर बचपना तो दिल मे बसता है,
उससे समां के रखो, वोह बसा ही रहेगा |
वोह खिलखिलाहट,
वोह प्यार,
सारे जग मे आज भी बाँट ते चलो |
:-)
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