Friday, September 3, 2010

Bachpan Chala Jaye Bachpana na Jaye

बचपन चला जाये |

बचपना न जाये |


वक़्त आ चूका - नादानियां छोड़ दो,

पर शरारतों की नज़ाकत को बचा के रखो |


बचपन जा चूका - मासूमियत को परे करो,

पर बचपन की उस मुसकुराहट को कभी किनारे न करो|


वोह समय बीत गया - जब माँ के हाथ से ही रोटी खाते थे,

माँ के खाने की आज भी तारीफ करो |


जीवन का वोह मोड़ आ चूका - जब माँ का आँचल छोड़ना पड़ेगा,

पर माँ के चरणों से कभी दूर न जाना |


बचपन अब पीचे छूट गया - बाप की समझ अब पुरानी हो चुकी,

पर बाप की नासिहियत की आज भी कदर करो |


बचपन छोड़ आये तुम पीछे - जब बहन को सताया करते थे ,

लेकिन उसकी उतनी ही और उससे भी ज्यादा फ़िकर, आगे भी करते रहो |


वोह पल चले गए - जब भाई के साथ लड़ जाते थे, बात बात पर,

पर यह कभी भूलना न, की उसी भाई के लिए, सारे जग से भी तो लड़ जाया करते थे |


उसी मिटटी मे जिसमें तुम खेले हो,

उस मिटटी को कभी पैसे के साथ मत तोलना |

लम्हे जो चले गए - बहुत सारी यादें दे गए,

भूलना मत उनको, क्यूँकी वहीँ से तो तुम्हारी शुरुवात हुई |



बचपन तो जाना ही था, वोह चले गया |

पर बचपना तो दिल मे बसता है,

उससे समां के रखो, वोह बसा ही रहेगा |


वोह खिलखिलाहट,
वोह प्यार,
सारे जग मे आज भी बाँट ते चलो |

1 comments: